Tuesday, December 29, 2009

घोर अन्नाय


हो गया है घोर अन्नाय रुचिका के साथ,
भाई और पिता भी पिस गए, बिना किसी बात।
राठौर जैसे पिसाच को जेल भिजवादो,
और रुचिकाओं की अब 'बलि' रुकवादो
शर्म की बात है, पद का राठौर ने दुरुपयोंग किया,
हँसते खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया।
क्या बिगाड़ा था इस परिवार ने, इस वर्दीधारी का,
नशे में अँधा हो गया और काम किया गद्दारी का।
हे देश के जिम्मेदार लोगो, अब तो न चुप रहो,
न्याय दिलाने की खातिर, अब तो कुछ करो।
काश मेरे देश में, न्याय में देर न होती,
तो तय था की रुचिका, आज जिन्दा होती।
तो राठौर ही नहीं, सब 'राठौरों' को ठीक जगह पहुँचवादों,
उनके घोर अन्नाय की सजा उन्हें दिलवादो।

फोटो साभार: http://www.ptinews.com/news/445301_Fresh-FIR-against-Rathore--others-in-Ruchika-case


राज

Monday, December 28, 2009

नदियाँ

बहती हैं नदियाँ पहाड़ से
कल-कल करती हुई,
लगती हैं, बड़ी मनोहर,
ऊपर से आती हुई।
देखकर इन्हें मचलता है
मेरा चंचल मन,
देखता हूँ, सपने में
उन्हें होकर अविरल।
काश नदियों सा जीवन
सब लोगो को मिल पता
जो अपना ही भला न करके,
दूसरों के भी काम में आता।

Sunday, December 13, 2009

नेता जी क्यों भूल गए?

नेता जी क्यों भूल गए हो
आप हमारे इस क्षेत्र को ?
जिसमें वायदे किए थे, तुमने,
हम आएंगे, फ़िर भी मिलने।
"एक बार बस हमें जिता दो,
संसद भवन तक पहुँचा दो
हम आएंगे फ़िर भी यहाँ,
बदल देंगे इस क्षेत्र की काया,
गरीबी का कर देंगें, सफाया"।
पर जितने के बाद तो...
आप सब भूल गए
पाँच साल के लिए अब आ

ईद के चाँद क्यों बन गए?

राज

Saturday, December 12, 2009

कटते जंगल

दुःख लगता है मुझे
जंगल को कटते देखते,
सह नही सकता अब मैं
जंगलो को उजड़ते देखते।
लोगो को समझाऊँगा,
जंगल का न नाश करो,
अपने ही जीवन पर
ऐसे न प्रहार करो।
जंगल हैं, हमारे जीवन की आश,
इनका न करो ऐसे विनाश,
इस विनाश को रोकना ही होगा
तब ही तो हमारा कुछ भविष्य होगा।


राज

Wednesday, December 9, 2009

सुंदर गाँव बनायेंगे

गाँव अपने चारो ओर से
खूब सुंदर बनायेंगे,
जिले ओर देश में भी
सभ्य कहलवायेंगे।
कूड़े-करकट को हम अब
एक जगह रखवायेंगे,
खाली जगह में चारो ओर,
हरे पेड़ लगवाएंगे।
फ़िर न होगा दूषित वातावरण,
शुद्ध हवा हम पाएंगे,
अच्छा स्वस्थ्य पाकर हम,
आगे को बढ़ते जायेंगे।
हमारे सुंदर गाँव की चर्चा
होवेगी फ़िर चारो ओर,
प्रेरणा हमसे पाकर के
गाँव बनेगें सुंदर और।

राज

हाथी और बच्चे

हाथी जब भी गाँव में आता
सब बच्चो के मन को भाता
हाथी जोर से वे चिल्लाते
दूसरो को भी संग बुलाते
आओ भाईओं, आओ बहना
देखो हाथी का चलना फिरना,
गली-गली में जब हाथी घूमे,
सारे बच्चे खुशी से झूमें ।
हाथी जब जाता दूसरे गाँव
लौटते बच्चे तब उलटे पाँव।

राज

टीवी और बच्चे

चाहे कितनी भी दूर गाँव में
क्यों न हो टीवी चलता
पहुँच जाते है बच्चे वहीं
करके अता-पता .
चिंता खाने की किए बिना
निकलते हैं वो घर से,
जाते डरते-कांपते हैं वे
मां-बाप के डर से,
कार्यक्रम कोई समझे ना,
इसकी नही परवाह,
फ़िर भी टीवी देखने की
खत्म न होती चाह ।
टीवी बच्चो के लिए
बन गया है नशा,
देखते ही बनती है, बच्चो की,
सेट के आगे दशा।

राज

मौत न गले लगाना तुम...

  कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है,  अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...