बहती हैं नदियाँ पहाड़ से
कल-कल करती हुई,
लगती हैं, बड़ी मनोहर,
ऊपर से आती हुई।
देखकर इन्हें मचलता है
मेरा चंचल मन,
देखता हूँ, सपने में
उन्हें होकर अविरल।
काश नदियों सा जीवन
सब लोगो को मिल पता
जो अपना ही भला न करके,
दूसरों के भी काम में आता।
Monday, December 28, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मौत न गले लगाना तुम...
कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है, अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...
-
हे पथिक, निराश न हो, परेशान न हो, चलता चल, मिल जाएगी मंजिलें गर तू हार गया हिम्मत तो, कौन तुझे संभालेगा, ये सच भी तू जान ले बाधाओ...
-
नेता जी क्यों भूल गए हो आप हमारे इस क्षेत्र को ? जिसमें वायदे किए थे, तुमने, हम आएंगे, फ़िर भी मिलने। "एक बार बस हमें जिता दो, संसद भवन ...
-
हार न मान कभी जीवन में , बढ जा आगे, जंग कर पीछे न हट लक्ष्य से, कर साहस, दरवाज़ा न बंद कर, गर हे शोषित, तुम प्रयत्त्न करोगे, जीत तुम्ह...
No comments:
Post a Comment