बहती हैं नदियाँ पहाड़ से
कल-कल करती हुई,
लगती हैं, बड़ी मनोहर,
ऊपर से आती हुई।
देखकर इन्हें मचलता है
मेरा चंचल मन,
देखता हूँ, सपने में
उन्हें होकर अविरल।
काश नदियों सा जीवन
सब लोगो को मिल पता
जो अपना ही भला न करके,
दूसरों के भी काम में आता।
Monday, December 28, 2009
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