चाहे कितनी भी दूर गाँव में
क्यों न हो टीवी चलता
पहुँच जाते है बच्चे वहीं
करके अता-पता .
चिंता खाने की किए बिना
निकलते हैं वो घर से,
जाते डरते-कांपते हैं वे
मां-बाप के डर से,
कार्यक्रम कोई समझे ना,
इसकी नही परवाह,
फ़िर भी टीवी देखने की
खत्म न होती चाह ।
टीवी बच्चो के लिए
बन गया है नशा,
देखते ही बनती है, बच्चो की,
सेट के आगे दशा।
राज
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मौत न गले लगाना तुम...
कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है, अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...
-
भारत एक विशाल देश है. इसमें अनेक भाषाओँ के बोलने वाले लोग हैं, जो विभिन्न प्रान्तों में रहते हैं. भारतवासियो के धर्म भी अलग-अलग हैं, कोई हिन...
-
हो गया है घोर अन्नाय रुचिका के साथ, भाई और पिता भी पिस गए, बिना किसी बात। राठौर जैसे पिसाच को जेल भिजवादो, और रुचिकाओं की अब 'बलि' र...
-
नेता जी क्यों भूल गए हो आप हमारे इस क्षेत्र को ? जिसमें वायदे किए थे, तुमने, हम आएंगे, फ़िर भी मिलने। "एक बार बस हमें जिता दो, संसद भवन ...
No comments:
Post a Comment