चाहे कितनी भी दूर गाँव में
क्यों न हो टीवी चलता
पहुँच जाते है बच्चे वहीं
करके अता-पता .
चिंता खाने की किए बिना
निकलते हैं वो घर से,
जाते डरते-कांपते हैं वे
मां-बाप के डर से,
कार्यक्रम कोई समझे ना,
इसकी नही परवाह,
फ़िर भी टीवी देखने की
खत्म न होती चाह ।
टीवी बच्चो के लिए
बन गया है नशा,
देखते ही बनती है, बच्चो की,
सेट के आगे दशा।
राज
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