तुम सोचते हो कि, हमारी यह हालत किसने कर दी है
मैं कहता हूँ, क्या तुम स्वयमं इसके लिए जिम्मेदार नही हो,
क्योंकि तुमने कभी शोषण का विरोध ही नही किया।
विचारों या अहिंसा से इसका जवाब ही नही दिया,
गर तुम खड़े होते संगठित होकर,
अन्याय व शोषण के दमन के लिए
तो किसकी मजाल होती आज
जो तुम्हे अपमानित करता बेखौफ होकर।
उठो अभी भी वक्त है, सुनहरे कल के लिए,
शिक्षित बनो और संगठित रहो, जंग के लिए,
ये जंग हथियारों व हिंसा की नही हो सकती
बिना ईश्वरीय प्रेम व सत्य के क्रांति हो नही सकती।
राज
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