घूमते हैं चारो तरफ़, इंसानों के वेश में शैतान
करलो अपने देश में आज, उनकी पहचान
खरीद लेते हैं वें, पुलिस को, रिपोर्ट दर्ज होती नही,
आम इन्सान की कद्र, वहां फ़िर होती नही।
बम-विष्फोट से करते हैं वें, जनता को आतंकित,
अच्छे लोग हैं उनकी नियत से, आज भी आशंकित,
घोटालो पे घोटाले कराते है ये लोग,
जनता का पैसा भी दिन दहाड़े खाते हैं लोग,
कैसे देश मुक्त होगा, इनसे, सोचता हूँ मैं,
इसलिए कलम उठाया है, लिखने को मैं।
राज
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