Tuesday, November 24, 2009

हमारा समाज

कहते है लोग सारे, समाज हमारा खराब है
अच्छा करदे कोई आकर, दिल की बस ये मुराद है।
कौन आयेगा कहाँ से, इसे ठीक करने के लिए,
जब मुल्क ही सारा ऐसे बर्बाद है।


आज हमको अपना करतब सूझता नही,
कहते है दूसरो की कार्य-शैली अंधकार है।
हे भाइयो, आओ अपना घर स्वयं बनाये,
दूसरो के सिर पर न, जिम्मेदारी ठहराए।


गर आज न जागकर, कुछ करेंगे हम,
तो दुनिया में, सबसे पीछे ही रहेंगे हम।
फ़िर किसी का कहना कि, समाज हमारा खराब है,
ख़ुद बताएगा कि, समाज का हर शख्स इसका जिम्मेदार है।

राज

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