गंदगी गाँव-शहर में बढती ही जा रही है
परेशां ये सबको करती ही जा रही है।
पूरे समाज की परेशानी है ये, जानते है सब लोग
फ़िर भी अपने कर्त्तव्य से अनजान है ये लोग।
प्लास्टिक व कागजो की, सड़क पर भरमार है।
सही जगह पर फेंकने की, नही किसी को सरोकार है।
सोचते हैं देशवासी अपने, दूसरो का है ये काम
इसलिए "सफाई जाग्रति अभियान भी, रहा है नाकाम
गंदगी फेंककर यहाँ वहां, शान से चलते है लोग
बहाना समय बचत का, कितने ही बनाते है लोग।
गंदगी फेको सही जगह पर, देश सुंदर बनाये
अपने को, और देश को, सभ्य कहलवाए
साफ-सुंदर देश की चर्चा फेलेगी चारो और
बीमारी और प्रदूषण भी भाग जायेंगे दूर ।
राज
Monday, November 23, 2009
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मौत न गले लगाना तुम...
कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है, अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...
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