ऐ हरियाली तुम मुझे अच्छी लगती हो
तुम अपने स्वरुप से मेरा मन मोहती हो।
कितनी तुम आकर्षक हो, ये सोचता हू मै
नही तुम्हारा विकल्प भी, ये देखता हू मै।
तुम्हे ही माना गया है, मानक खुशहाली का
तुम ही चिहन हो, सभ्य जीवन शैली का।
सराहने पर भी तुम, घमंडी नही लगती
है ये बात सिखने की, किसी को बुरी नही लगती
कुछ गावो-शहरो में आजकल तुम्हारी धूम है
असभ्य है वो शहर-गाव जो तुम से मरहूम है।
राज
Monday, November 23, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मौत न गले लगाना तुम...
कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है, अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...
-
हे पथिक, निराश न हो, परेशान न हो, चलता चल, मिल जाएगी मंजिलें गर तू हार गया हिम्मत तो, कौन तुझे संभालेगा, ये सच भी तू जान ले बाधाओ...
-
नेता जी क्यों भूल गए हो आप हमारे इस क्षेत्र को ? जिसमें वायदे किए थे, तुमने, हम आएंगे, फ़िर भी मिलने। "एक बार बस हमें जिता दो, संसद भवन ...
-
हार न मान कभी जीवन में , बढ जा आगे, जंग कर पीछे न हट लक्ष्य से, कर साहस, दरवाज़ा न बंद कर, गर हे शोषित, तुम प्रयत्त्न करोगे, जीत तुम्ह...
No comments:
Post a Comment