Monday, March 29, 2010

देश को आगे बढ़ने दो

देश को आगे बढ़ने दो, विकास के पहियें न थमने दो,
साथ-साथ तुम कदम बढाओ, देश का मान न घटने दो.
काम करो सब, चोरी नहीं, दुर्वय्सनो से दूर रहो ,
मेहनत की आओ रोटी खाएं, आलस्य के न पास रहो.

राजनीति भी चलने दो, सच्चे नेता को सहयोग दो,
वोट न करके, घर में रहके, गुंडों को न जोश दो.
देशहित की सोचो तुम, अपने ही की न बात करो,
समाज आगे कैसे बढेगा, परस्पर वार्तालाप करो.

सार्वजनिक संपत्ति को, मूल्यवान सदा  जानो तुम,
रेल, सड़क, और पानी को, यूहीं व्यर्थ न ठानो तुम.
देशप्रेम की भावना रखो, संकीर्णता का त्याग करो,
विकास कैसे होगा अपना, सदा इसका प्रयास करो.

राज

Monday, March 8, 2010

हमारी सोच

हाथ से पंखा करने के बजाय बिजली की सेवा ले ली.
हाथ से कपडा धोने के बजाय, वाशिंग मशीन खरीद ली.
पैदल चलने की बजाय, मोटर साईकिल, बस, और कार की सवारी कर ली.
कुछ कदम चलकर नाटक, कुश्ती, नाच देखने के बजाय टीवी से दोस्ती कर ली.

जाकर पोस्ट ऑफिस में, पोस्टकार्ड, और टिकट अब कौन लाये
बहाना समय बचत का, इसलिए कंप्यूटर दुनिया की सैर कराए.
भूल गए वो लकड़ी की कलम, बार-बार स्याही में डुबोना
अब बाल-पेन और कंप्यूटर-माउस से सारे काम काज का होना.

घर, गाड़ी, और ऑफिस में वातानुकूलित वातावरण का अहसाश
भूल गए हम पसीना बहाना, और शरीर का कर लिया सत्यानाश.
सोचते हैं हम, बहुत विकसित हो गए हैं दुनिया में अब
लेकिन हमारी सोच ने कूड़ा कर दिया है सब.

लेकिन अब हम आगे बढ़ें हैं या फिर बहुत पीछे चले गएँ है क्या
प्रशन है सोचने का, जीवन और शैली के बदलने का
आओ अपने जीवन को देखें, केवल "विकास" से होगा क्या
अवसर है हमारे पास सार्थक जीवन जीने का.

मौत न गले लगाना तुम...

  कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है,  अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...