अपनी भाषा की बात ही अलग है। इसमें जो भी मन में आता है वह वयक्त करने में कठिनाई नही होती। इस ब्लॉग पर मैं कुछ अपने मन की बातें सब के सामने रखना चाहता हूँ । ईश्वर की कृपा और दया से जो ज्ञान मिला है, उसे सबके सामने रखने से खुशी मिल रही है।
यदि आप को कुछ अच्छा लगे तो जरुर लिखकर बताना।
आपका दोस्त
राज
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मौत न गले लगाना तुम...
कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है, अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...
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नेता जी क्यों भूल गए हो आप हमारे इस क्षेत्र को ? जिसमें वायदे किए थे, तुमने, हम आएंगे, फ़िर भी मिलने। "एक बार बस हमें जिता दो, संसद भवन ...
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हार न मान कभी जीवन में , बढ जा आगे, जंग कर पीछे न हट लक्ष्य से, कर साहस, दरवाज़ा न बंद कर, गर हे शोषित, तुम प्रयत्त्न करोगे, जीत तुम्ह...
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हे पथिक, निराश न हो, परेशान न हो, चलता चल, मिल जाएगी मंजिलें गर तू हार गया हिम्मत तो, कौन तुझे संभालेगा, ये सच भी तू जान ले बाधाओ...
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