जब मेल चारो ओर होगा, न कोई दुश्मन, न कोई दुष्ट होगा,
तब भारतीयता दिखाई देगी, और न कोई अपना या पराया होगा।
जब बंज़र और रेगिस्तान में भी, पक्षियों का कोलाहल होगा,
तब मेरा भारत अति सुन्दर और हरा-भरा होगा।
जब गरीब का साथ देगा धनी, अंतर न होंगे दोनो में,
तब मेरा भारत चमकेगा विश्व के कोने कोने में।
जब लड़किया जाएँगी स्कूल में, शिक्षा का प्रसार होगा,
तब मेरा भारत आगे बढेगा, और एक अन्धकार का अंत होगा।
जब देश का हर नागरिक, समझेगा अपनी जिम्मेदारी को,
अंत होगा भारत की गन्दी गलियों का, जितेगें हर बीमारी को।
जब किसान पायेगा पूरा फल, अपनी गाढी मेहनत का,
तब भारत किसी का, मोहताज नही होगा, होगा अंत शोषण का।
जब तक देशवासी अपना, खाने, कपडे, और मकान से मरहूम होगा,
तब तक न 'भारत चमकने' की बात का, मुझे कभी विश्वास होगा।
राज
Friday, November 6, 2009
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