Friday, July 12, 2019

सावन की सुंदरता और उसका प्रभाव

जलती धरती की, आया सावन, प्यास बुझाने
घास बन गई हरी-हरी , जंगल भी बने सुहाने
किसान चला खेतो में, बैलों से हुई, जुताई
मिटटी की खुशबु फ़ैली, धान की हुई रोपाई।

बगुलों की आयी, भीड़ कही से, इतराते, इठलाते
बैठते, उड़ते, बैलों के पीछे , खाना ढूंढ के खाते
हवा बहती शीतल सी, हलकी वर्षा करती शोर
पास में ही, कोयल गाती, शमां बनता, सब ओर

प्रकृति अब नहा ली है, सब  गंदगी हो गयी दूर
धूल भाग गयी पानी से, हरयाली अब चारो ओर
सावन के क्या कहने अब तो, बरसे है घनघोर
धरा का हुआ श्रृंगार, मोर भी नाचे जंगल ओर.


सन्दर्भ : सावन की सुंदरता और उसका प्रभाव

राज



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