Friday, July 12, 2019

सावन की सुंदरता और उसका प्रभाव

जलती धरती की, आया सावन, प्यास बुझाने
घास बन गई हरी-हरी , जंगल भी बने सुहाने
किसान चला खेतो में, बैलों से हुई, जुताई
मिटटी की खुशबु फ़ैली, धान की हुई रोपाई।

बगुलों की आयी, भीड़ कही से, इतराते, इठलाते
बैठते, उड़ते, बैलों के पीछे , खाना ढूंढ के खाते
हवा बहती शीतल सी, हलकी वर्षा करती शोर
पास में ही, कोयल गाती, शमां बनता, सब ओर

प्रकृति अब नहा ली है, सब  गंदगी हो गयी दूर
धूल भाग गयी पानी से, हरयाली अब चारो ओर
सावन के क्या कहने अब तो, बरसे है घनघोर
धरा का हुआ श्रृंगार, मोर भी नाचे जंगल ओर.


सन्दर्भ : सावन की सुंदरता और उसका प्रभाव

राज



Monday, July 1, 2019

जिओ और जीने दो

जिओ और  जीने दो, मानव बन, पशु नहीं
किसी की हत्या न कर, दुखे किसी का दिल नहीं
ऐसे कर्म कर, हो जिससे सभी का सदा भला
बुरा न करके अच्छा बनके,  दुनिया से जा चला.


लोग तुझे याद करें, कुछ भलाई के लिए
अपने लिए तो सब जिये, जिंदगी जीने के लिए
बन सामाजिक प्राणी, दूसरों के लिए,
अपनी चिंता तो पशु भी है, करते, पेट के लिए.


इस सुन्दर जीवन को, किसी के नुकसान में न खफा
बन जा मानव, पशु नहीं, करले अपने दिल को शफा
जीवन बन जायेगा सार्थक, मिले जाएगी, तुझे  मंजिले
फिर इस जीवन को, जब तक दम है, बढ़िया से जीले।


सन्दर्भ : भीड़ द्वारा मानव की हत्याएं


राज

मौत न गले लगाना तुम...

  कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है,  अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...