Thursday, September 23, 2010

बुरी बरसात

परेशान, हम बारिश से
क्या करें, कहाँ जाएँ ? 
अपने टपकते घर की व्यथा 
किसको जाकर  सुनाएँ.
घर में पानी, बहार में कीचड़,
चारो और ये हाल है. 
बाहर जाने को तो मिलता नहीं
घर में भी बुरा हाल  है.
दिन कईं बीत गए आज
ऐसे ही बारिश के चलते.
कहाँ जाये कुछ समझ नहीं आता
घर से बाहर निकल के ? 

राज 

बाढ़ और अच्छे नेता

बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में


नेता जी घूमने गए.


गरीबी व् बेबसी का


दृश्य वे चारो ओर पाए.


ह्रदय  में उनके उमड़ आया 


करुणा का भाव.


सहायता-राशि मंज़ूर कर दी


आव देखा न ताव.


कुछ दिनों के बाद में

सहायता पहुँची जब गाँव,


गांववासी सब खुश हुए,


देख के नेता जी का प्रभाव.


ऐसे नेता देखने में


होते हैं बहुत कम,


जिनकी कथनी-करनी में


होता है कुछ दम. 

राज

मौत न गले लगाना तुम...

  कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है,  अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...