Saturday, February 6, 2010

स्वार्थी नेता

दुर्भाग्य मेरे देश का, जो स्वार्थी नेता पैदा हुए,
अपनी झोली भरने को, देश बाँटने में लगे हुए.
भाषा, प्रान्त, और धर्म को हथियार बना लिया,
विकास और देश-प्रेम को दिन दहाड़े तज दिया.

कैसे इनकी नेतागिरी चमके यही इनकी चिंता  है,
एक बड़ा भारतीय वर्ग, आज भी नींद में सोता है.
तभी तो झूठे नेताओं का अभुदय हो रहा है,
गन्दी राजनीति का खुले-आम, प्रदर्शन  हो रहा है.

देश कैसे आगे बढेगा, ये विचार अब दिखता  नहीं,
"मेरी कुर्सी सुरक्षित रहे,"  इसके सिवाए कुछ सूझता नहीं.
हे ईश्वर अब सदबुद्धि दो, हमारी आंखे खोल  दो,
झूठे नेताओं को समझ सकें, ऐसी हमें सोच दो.

राज

Monday, February 1, 2010

भारत की अखंडता को खतरा

भारत एक विशाल देश है. इसमें अनेक भाषाओँ के बोलने वाले लोग हैं, जो विभिन्न प्रान्तों में रहते हैं. भारतवासियो के धर्म भी अलग-अलग हैं, कोई हिन्दू है तो कोई मुस्लिम, कोई सिख तो कोई मसीही, कोई जैन है तो कोई पारसी. ये सब लोग अपने आप को हिन्दुस्तानी समझते हैं, और प्रेम से रहते हैं. लेकिन कुछ नेता लोगो को ये पारस्परिक सोहार्द गले नहीं उतरता है. वे चाहते हैं कि उनको कोई ऐसा मुद्दा मिले, जिस पर चलकर वे रातोरात "नेता" बन जाएँ. इसी कूटनीति को लेकर हमारे "नेता जी" सड़क और गलियो में नारे लगवाते हैं, और सरकारी या फिर व्यक्तिगत संपत्ति को हानि पहुंचाते हैं.

ठाकरे परिवार के लोगो ने आजकल मुंबई को अपनी संपत्ति मान लिया है. वे लोग कहते फिर रहें हैं कि "मुंबई मराठियों  की  है", "मुंबई में वही काम करेगा जो ठाकरे परिवार के दृष्टिकोण से फिट होगा" अरे भाई किसने आपको ये अधिकार दे दिया है? क्या मुंबई आपकी पारिवारिक संपत्ति है क्या ? क्या आपको नहीं मालूम कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी  तक  भारत एक है? और इस भारत विशाल का कोई भी बेटा या बेटी जो जहाँ चाहे बस सकता है, और जो जहाँ चाहे काम कर सकता है.

ठाकरे परिवार के लोगो को अपनी राजनीति करनी चाहिए, लेकिन इससे देश की शान और अखंडता में आंच नहीं आनी चाहिए. स्वार्थी राजनीति लम्बे समय तक नहीं चलती, और सब लोगो को मूर्ख नहीं बना सकती.

आज ये लोग सिर्फ मुंबई की मांग कर रहें हैं. यदि इनसे निपटा नहीं गया तो  कल को पूरे महारास्ट्र को अलग बताएँगे.इन्ही लोगो के पदचिन्हों पर चलकर कोई  कोलकत्ता और पूरे वेस्ट बंगाल इत्यादी की मांग करेगा. इसलिए  भारत सरकार को चाहिए कि भारतदेश की अखंडता के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों से सख्ती से निबटे. इससे उभरते नेताओं को,  आने वाले समय की राजनीति करने में एक पाठ सिखने को मिलेगा.  और हमारा प्यारा देश अखंडित होकर विश्व में चमकते ही रहेगा.

मौत न गले लगाना तुम...

  कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है,  अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...