Thursday, February 9, 2012

शांति

शांति अपनी तुम्हें दूंगा, कहते हैं प्रभू,



कर दूंगा जिंदगी भी नयी, बताते हैं प्रभू .

शांति तुम्हे मिलेगी नही शराब में,

शांति तुम्हें मिलेगी नही आदत खराब में.

जिसकी तुम्हे है तलाश, वो मेरे पास है,

जीवन खिवैया मैं हूँ, मेरा नाम तेरी आश है।

हे इन्सान वापस आजा, शान्तिदाता के पास ,

छोड़ दे बेकार के धंधे, करले अब पश्चताप।

कर भरोसा मालिक पर, शांति के लिए,

रास्ता सीधा है यही, मंजिल पाने के लिये।





मेरी बेटी

भाई को पापा की गोद में देख के, मेरी बेटी ने बोंला


पापा क्यों नही लेते मुझे भी गोद,

क्या में उनकी बेटी नही हूँ,

क्या मैं उनको प्यारी नही हूँ, ?

कैसे समझाऊ, बेटी को मैं,

प्यार मेरा बराबर है तुम दोनो के लिए

गोद में तुम रहो न रहो,

दिल मेरा धड़कता है, तुम दोनो के लिए।


लेकिन बेटी समझी नही, क्योंकि

बहुत छोटी है,

समझाने के लिए कोशिश भी की

मगर बात नही बनी,

क्योंकि भाई को केवल गोद में लेना

बात उसके लिए अटपटी है!


दूर रहकर बेटी से, जब बात यह मैंने सुनी

दिल में एक टीस सी चुभी

क्यो दूर हूँ मैं, इतना

काश यह शिक़ायत दूर कर देता

हो चाहे खर्चा भी कितना ?

दोस्ती

दोस्तों से बढकर भी एक दोस्त है दुनिया में.


नाम है उसका येशु,

दोस्तों की दोस्ती होती है कुछ दिन की,

होती है कुछ स्वार्थ से भरी,

इसलिए तो दोस्तों पर भरोसा करना भी,

हो गया है कितना कठिन.

घूम रहे हैं दोस्तों के रूप में भी

हैं कितने ही बुरे इन्सान.

चाहते है जो, केवल अपना ही भला,

दोस्ती की होती नहीं ऐसो को परवाह.

दोस्ती का मतलब उनके लिए,

उनका भला भर होता है,

साथी जाये भाड़ में, चिंता होती है,

केवल अपनी मात्र!

नहीं येशु दोस्त ऐसा दोस्तों,

उसने तो अपनी दोस्ती को प्यार,

की हद तक दिखाया है,

क्रूस है उस दोस्ती का निशान.

बाहें खोलकर उसने कहा,

इतना प्यार मैं तुमसे करता हूँ.

तुम्हारी दोस्ती की कदर भी,

मैं करता हूँ.

मौत न गले लगाना तुम...

  कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है,  अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...