Thursday, October 7, 2010

प्रेम के आगोश में.

जीवन के हर समय में, प्यार को न भूल, 
सपनो के पंखो पर न, मगन हो के तू झूल. 

प्यार तुझे देगा कल, प्यार तुझे देगा फल
बिना प्यार के तो तू, हो जायेगा विफल. 


देश से तू कर प्यार, देशवासी को भी न भूल, 
आगे बढ़ और कर्म कर, सफलता को चूम.


घृणा का छोड़ दे दामन, नई राह ले,
छोड़ दे कुटिलता सारी, प्रेमी बन जा रे.


प्रेम से सब बनते काम, याद रखले भाई,
बिगड़ते भी बन जायेंगे, कोशिश तो कर ए राही.


खुद भी डूब कर देख ले, प्रेम के इस आगोश में.
क्या जाने कब दिन ढल जाये? व्यर्थ न जी यूँ रोष में.


राज 

मौत न गले लगाना तुम...

  कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है,  अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...