Saturday, March 25, 2023

मौत न गले लगाना तुम...

 

कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है, 

अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है...

मैं होकर परेशां, न छोडूंगा मैंदान, मेरे लिए, बात पक्की सी है, 

कौन डगमगायेगा, लक्ष्य से, सटीक बात, मेरे दिल में बैठी है. 


अब जात-धर्म की परवाह नहीं, कोई  कैसी भी बेइज्जती नहीं 

हो गया हूँ, पार इनसे, अब मुख छिपाने की आवश्यकता नही,

मैं एक प्रितिष्ठित प्राणी, समझो न सामान्य मुझे, मैं आपके जैसा वही, 

हैं सारे गुण और योग्यताएँ मुझ में, देखलो, देकर, एक अवसर कहीं, 


मित्र, झूठ पर न करो  विश्वास, कि आप किसी से कम हैं, 

रख हिम्मत, आगे बढ़, दिखा कि, आप में भी वो दम है, 

कर प्रमाणित, जीवन के कार्य से, अवसर को न जाने दो. 

चिंता मत लो, आप जीवन की गाड़ी को, फर्राटे तो भरने दो.  

 


picturecredit@bing.com 



 

Sunday, May 31, 2020

क्या पिछडे और शोषित वर्गों में से लोग व्यापार (बिजनस) की सोचेंगे?


केस स्टडी: एक गॉंव में 5 परिवार बनिया समुदाय के रहते हैं, और सब के सब बिजनेस में लगे हुए हैं. सब के सफल बिजनेस हैं, उनके पास खेती की जमीन, ट्रक, बस, और अच्छी सुविधाये हैं. उनके बच्चे पढ़े-लिखे होने के साथ-साथ नौकरी में भी गये हैं. उनके पास घर की छत के साथ ही, कार इत्यादि सुविधाये भी हैं.

उनका बिजनेस किस पर निर्भर है? उनका बिजनेस चलता है, जब लोग उनका सामान खरीदने के लिए उनकी दुकानों पर आते हैं. उनका बिजनेस चलता है, जब लोग अपने (खेती की उपज) सामान उनको बेचने आते है.
इस बिजनेस की सफलता के पीछे कौन हैं, उस गॉंव के लगभग दो सौ शोषित और पिछड़े परिवारों के लोग. जो कि दिन-रात कस्टमर (ग्राहक) बनकर अपनी दिनचर्या के सामान खरीदने उन 5 परिवार्रो की दुकानों पर, खरीदारी करने जाते हैं.  

शोषित और पिछड़ों के आर्थिक और सामाजिक हालात: इन दो सौ परिवारों के हालात अच्छे नही है. इनमें से अधिकतर अत्यधिक निर्धनता और परेशानी के जीवन जी रहे हैं. इनके पास बहुत ही छोटे घर, अशिक्षित बच्चे, और जमा पूंजी के नाम पर, कुछ भी नही होना है. इनके पास काम के नाम पर सिर्फ मजदूरी मिलती है, और वह भी पूरे वर्ष भर नहीं. इनको काम न होने पर क़र्ज़ लेकर पेट पालना पड़ता है. कर्ज़ ना चुकाने की स्थिती में, अपनी पत्नी के जेवर, और घर के बर्तन तक उन पैसे वालों के दुकानों पर औने-पौने दामों पर गिरवी या फिर बेचने पड़ते हैं.

भारतीय समाज के बहुसंख्यक गरीब, पिछड़े, और शोषित समाज की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन? इस व्यवस्था का पोषक समाज और कुछ झूठी पुस्तकें और मान्यताएं हैं. ये पुस्तकें और मान्यताये ये सिखाती रही हैं कि, बहुसंख्यक और मूल-निवासी लोगो को बिजनेस (व्यापार) करने का अधिकार नही है. उनका काम धन अर्जित करना या फिर धनोपार्जन करना नही होकर, कुछ लोगो की “सेवा” करना है. इसी “सेवा’ के माध्यम से उन्हें अपना जीवन निर्वहन करना चाहिए.

भारतीय समाज के बहुसंख्यक गरीब, पिछड़े, और शोषित समाज को ये सिखाया जाता रहा है कि वे पुरानी व्यवस्था को माना करें और उस पर प्रश्न-चिह्न न खड़े करें. नही तो उनके कर्मों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और उन्हें अगले जन्मों में, अतिरिक्त दुखों को भोगना पड़ेगा इत्यादि.

सच्चाई को जानिए और आगे बढिए: बिजनेस (व्यापार) पर किसी एक समुदाय का पुश्तैनी अधिकार नहीं है. आपका संविधान आपको भी व्यवसाय या नौकरी करने की पूरी छूट देता है. अगर आपके पास पैसा नही है, लेकिन आगे बढ़ने का जज्बा और लगन है तो आप सरकारी बैंक से, किसी ग्रामीण समूह, या किसी समृद्ध मित्र आदि से कर्ज़ इत्यादि लेकर अपना काम प्रारम्भ कर सकते हैं. जो खरीदार (कस्टमर) दूसरों की दुकानों से सामान खरीदते और बेचते हैं तो वो आपके पास भी खरीदने और बेचने के लिए आयेंगे, या फिर उनको आना चाहिए. आप अपने लोगो से इस सम्बंध में विचार-विमर्श करना चाहिए. ऐसा करके हम अपनों लोगो की सीधे मदद कर सकते  हैं. इस प्रकार जो लोग आर्थिक रूप और सामाजिक रूप से पिछड़ गये है, वे भी आगे बढने की सोच सकते है. 
बिजनेस (व्यापार) का प्रारम्भ कहाँ और किस चीज़ से करूँ: अपने चारो और घूम कर आयें. घूमते समय इस बात का अवलोकन करें कि आपके स्थान पर कौन सी चीज़ की माँग रहती है. कौन सा माल जल्दी खराब नही होता. क्या माल आसान से मिल जाता और बिक जाता है की नही.
गुब्बारे बेचना, मूंगफली बेचना, किराने की दुकान, महिलाओं के सौन्दर्य का सामान, कपड़े की दुकान, जूतों की दुकान, वेल्डिंग कार्य, मरम्मत के कार्य, बिजली का सामान, बर्तन का सामान, सब्जी की दुकान, चाय और मिठाई आदि का सामान, फसल के समय पर गेहूं और धान का क्रय, फल और फ़ास्ट फ़ूड की दुकान इत्यादि. ये सब मेरी सलाह मात्र है, किन्तु आप खुद अपने स्थानीय स्तर पर इस बात का निर्णय ले कि मै क्या काम कर सकता हूँ.


बिजनेस करना या फिर नौकरी करना आपका अधिकार है. अब इस अधिकार को प्रयोग करके अपनी और अपने आने वाली संतानों को स्वर्णिम भविष्य दे सकते है. आपके पास भी एक पक्का घर, शिक्षित संताने, कुछ बीघा जमीन, गाड़ी और सुखद भविष्य हो सकता है.

अब आपको उन पुरानी पुस्तको या मान्यताओं से पीछा छुड़ाने के समय आ चूका है. बहुत समय बर्बाद हो चुका है. उठो और अपने हाथों को सबल बनाओ. प्रयत्न करो, मंजिलें स्वयं मिलने लगेगीं.
सारांश: कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया दुःख में है, परन्तु सर्वाधिक परेशान भारतीय समाज के बहुसंख्यक गरीब, पिछड़े, और शोषित समाज के गरीब मजदूर और कामदार लोग है. जिनके पास काम, पैसा, कुशल-शिल्प, और अवसर की कमीं का होना है. अब समय आ गया है कि आप सब इस परिस्तिथि को समझे और यहाँ से आगे बढ़ें. भाग्य आपका कुछ नही बिगाड सकता है, भाग्य तो बनाना पड़ता है. अपनी गरीबी को हटाना और हटवाना है तो हर सुबह आपको नया संदेश देती है. कोशिश तो कीजिये...

 Photo crredit@Yahooimages

Saturday, May 2, 2020

हे पथिक, निराश न हो





हे पथिक, निराश न हो, परेशान न हो, चलता चल, मिल जाएगी मंजिलें
गर तू हार गया हिम्मत तो, कौन तुझे संभालेगा, ये सच भी  तू जान ले

बाधाओं  को पार करके, अपने जीवन को सवांर ले , याद क्रर ये तथ्य
जीवन को सुन्दर बनाना, अभावो के बावजूद, ये भी संसार का एक कथ्य

बढ़ता जा अडिग होकर, स्वर्णिम भविष्य करता प्रतीक्षा, तुम्हारी
कर दिखा ऐसा, जीवन में जो, अब तक दूसरो  ने, करी  नहीं तैयारी

सोच न दूसरे, कैसे बढे आगे, क्या युक्ति, उन्होंने यहां लगाई
तुम अपनी जीवन की करो चिंता, और परिश्रम से बात बन जाई




Tuesday, April 14, 2020

भारत रत्न डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को समर्पित




दे गये, बाबा साहब स्वतंत्रता, अपने लोगो को, भारतीय संविधान से
उद्घोष किया, आशा का, शोषितों हेतु, महानायक ने, अपने ज्ञान से

पढ़-लिखकर, अभावो के बावजूद, पार कर गये, हर उस बाधा को
दिखाई मेधा, हर जगह, जहाँ थी, वर्जनाये, अपने उस बाबा को

कर्तव्य ऐसा कर गये, अल्पावधि में,-पीड़ित न कभी भूल पायेगा
मिली अनुभूति जो आज़ादी की, वो उन्हें, वर्षो-पीढ़ियों को बतायेगा

कायल है हम तो, आपकी प्रतिभा के, कितनी आपकी प्रशंशा करें
दिखाया आपने, जीवन से अपने, अभावो की ना, कभी चिंता करें

मंजिले स्वय ही, मिलती रही, जब आप ने, अथक प्रयाश किया
निर्धनता, दुखों और पृष्टभूमि ने, कभी न, आपको निराश किया.

धन्य है वो माता- पिता, जिन्होंने, आपको, उत्तम संस्कार दिए
भारत के पीड़ितों हेतु, जीवन-गरिमा, शिक्षा, और मूल्य दिए

प्रसंशा में, कम पड जाते है, शब्द मेरे, सीमित है सब्दकोश मेरा,
धन्यवाद ज्ञापन आपको, जिन्होंने, जीवन में ला दिया नया सबेरा.





संदर्भ: 14 अप्रैल 2020, भारत रत्न डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि



मौत न गले लगाना तुम...

  कहा किसी ने, "दुनिया का काम है कहना" ये बात पते की है,  अपने लक्ष्य पर, रखो निशाना, बाकि चीज़े सारी, धता सी है... मैं होकर परेशां...